मुदित महीपति मंदिर आए। ...में अनुप्रास अलंकार है। .
मुदित महीपति मंदिर आये में कौन सा अलंकार है
मुदित महीपति मंदिर आए। ...में कौन सा अलंकार है
इस करुणा कलित विकल रागि हृदय में अनी बजती में अलंकार है
जिन दिन देखे वे कुसुम गई में कौन सा अलंकार है
बरजीते सर मैन के, ऐसे देखे मैं न हरिनी के नैनान ते हरिनी के ये नैन इसमें कौन सा अलंकार है
काली घटा का घमंड घटा, नभ तारक मंडलवृंद खिले मैं कौन सा अलंकार है
वन शारदी चंद्रिका-चादर ओढ़े।’ में कौन सा अलंकार है
सपनों के गुब्बारे फोड़ती सुबह में कौन सा अलंकार है
‘कहती हुई यूँ उत्तरा के नेत्र जल से भर गए। हिम कणों से पूर्ण मानों हो गए पंकज नए।’ में कौन सा अलंकार है।
जगी वनस्पतियां अलसाई मुह धोया शीतल जल से में कौन सा अलंकार है
‘नील गगन-सा शांत हृदय था सो रहा।’ में कौन सा अलंकार है
परहित सरिस धर्म नहिं भाई में कौन-सा अलंकार है
पाहुन ज्यों आए हो गांव में शहर के में कौन सा अलंकार है
अंबर के तारे मानो मोती अनगन है में कौन सा अलंकार है
नभ मंडल छाया मरुस्थल सा दल बाँध के अंधड़ आवे चला में कौन-सा अलंकार है
अमिय मूरिमय चूरन चारु समन सकल भव रुज परिवारु में कौन सा अलंकार है
‘ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहन वारी। ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहाती है।’ में कौन सा अलंकार है
किसी सोच में हो विभोर साँसें कुछ ठंडी खिंची। फिर झट गुलकर दिया दिया को दोनों आँखें मिंची।’ में कौन सा अलंकार है
पंकज तो पंकज, मृगांक भी है मृगांक री प्यारी। मिली न तेरे मुख की उपमा, देखी वसुधा सारी में कौन सा अलंकार है
खग कुल कुल कुल सा बोल रहा में कौन सा अलंकार है
मन-सागर मनसा लहरि बूड़े-बहे अनेक में कौन सा अलंकार है
है जन्म लेते जगह में एक ही में कौन सा अलंकार है
तारे आसमान के हैं आये मेहमान बनि में कौन सा अलंकार है
‘शशि-मुख पर घूंघट डाले।’ में कौन सा अलंकार है
कालिंदी कूल कदंब की डारन में कौन सा अलंकार है
ले चला साथ मैं तुझे कनक ज्यों भिक्षुक लेकर स्वर्ण झनक में कौन सा अलंकार है
मेघमय आसमान से उतर रही है संध्या सुन्दरी परी सी धीरे धीरे धीरे।’ में कौन सा अलंकार है
चरर मरर खुल गए अरर रवस्फुटों से, में कौन-सा अलंकार है
सागर की लहर-लहर में है हास में कौन सा अलंकार है
उघरहिं बिमल बिलोचन ही के में कौन सा अलंकार है
जो खग हौं तो बसेरो करौं मिलि ,कालिंदी कूल कदम्ब की डारन,में कौन सा अलंकार है
‘तारा सो तरनि धूरि धारा मैं लगत जिमि, थारा पर पारा पारावार यो हलत है।’ में कौन सा अलंकार है
कोलाहल बैठा सुल्तान में कौन सा अलंकार है
ध्वनि मयी कर के गिरि-कंदरा, कलित-कानन-केलि-निकुंज को,में कौन सा अलंकार है
निर्धन के धन सी तुम आई में कौन-सा अलंकार है
शेष, महेश, गणेश, दिनेश, सुरेश हि जाहि निरंतर गावै में कौन सा अलंकार है
तारावलि-सी मृदु मुसकान में कौन-सा अलंकार है
दान-परसु बुधि-शक्ति प्रचंडा , बर-बिज्ञान कठिन कोदण्डा।’ में कौन सा अलंकार है
‘जगी वनस्पतियाँ अलसाई मुह धोया शीतल जल से’ में कौन सा अलंकार है
सागर के उर पर नाच नाच करती है में कौन सा अलंकार है
'कुल कानन कुंडल मोर पुखा, उर पे बनमाल विराजति है में कौन सा अलंकार है
मुख मानो चंद्रमा है में कौन सा अलंकार है
नदियाँ जिनकी यशधारा-सी ,बहती हैं अब भी निशि वासर में कौन-सा अलंकार है
मंगन को देखि पट देत बार-बार है में कौन सा अलंकार है
कूकै लगी कोयल कदंबन पर बैठी फेरि।’ में कौन सा अलंकार है
केकी रव की नुपुर ध्वनि सुन, जगती जगती की मूक प्यास।’ में कौन सा अलंकार है
सठ सुधरहिं सतसंगति पाईं में कौन सा अलंकार है
वृंदावन विहरत फिरै राधा नंद किशोर में कौन सा अलंकार है
चरण धरत, चिंता करत, चितवत चारहुँ ओर में कौन सा अलंकार है
‘दुख है जीवन-तरु के मूल।’ में कौन सा अलंकार है
केकी रव की नुपुर ध्वनि सुन, जगती जगती की मूक प्यास इसमें कौन सा अलंकार है
‘तब बहता समय शिला सा जम जायेगा’ में कौन सा अलंकार है
इस करुणा कलित हृदय में अब विकल रागिनी बजती में कौन सा अलंकार है
तोपर वारौं उर बसी, सुन राधिके सुजान, तू मोहन के उर बसी ह्वे उरबसी सामान. इसमें कौन सा अलंकार है
‘कालिका सी किलकि कलेऊ देती काल को’ में कौन सा अलंकार है
भर गया जी हनीफ़ जी जी कर, थक गए दिल के चाक सी सी कर, यों जिये जिस तरह उगे सब्ज़, रेग जारों में ओस पी पी कर इसमें कौन सा अलंकार है
बंदऊं गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुबास सरस अनुरागा में कौन सा अलंकार है
सो सुख सुजस सुलभ मोहि स्वामी में कौन सा अलंकार है
‘प्रकृति का अनुराग-अंचल हिल रहा है।’ में कौन सा अलंकार है
दीपक-सा जलना होगा में कौन-सा अलंकार है
रावनु रथी विरथ रघुवीरा’ में कौन सा अलंकार है
'सो सुख सुजस सुलभ मोहि स्वामी' में कौन-सा अलंकार है
‘यह हरा ठीगना चना बांधे मुरैना शीश पर।’ में कौन सा अलंकार है
भूप सहस दस एकहि बारा में कौन सा अलंकार है
किसबी, किसान-कुल बनिक, भिखारी, भाट में कौन सा अलंकार है
राम नाम मनि-दीप धरु, जीह देहरी दवार, एक राम घनश्याम हित चातक तुलसीदास।’ में कौन सा अलंकार है
मुख मयंक सम मंजु मनोहर,में कौन सा अलंकार है
लो यह लतिका भी भर लाई, मधु मुकुल नवल रस गागरी में कौन सा अलंकार है
को घटि ये वृषभानुजा वे हलधर के वीर में कौन सा अलंकार है
निपट निरंकुस निठुर निसंकू में कौन सा अलंकार है
‘है वसुंधरा बिखेर देती मोती सबके सोने पर। रवि बटोर लेता है उसको सदा सवेरा होने पर।’ में कौन सा अलंकार है
लहरें व्योम चूमती उठतीं में कौन सा अलंकार है
‘पीपर पात सरिस मन डोला’ में कौन सा अलंकार है
बिनु पग चले सुने बिनु काना में कौन सा अलंकार है
‘श्रद्धानत तरुओं की अंजली से झरे पात, कोंपल के मूंदे नयन थर-थर-थर पुलकगात।’ में कौन सा अलंकार है
मेघ आए बड़े बन ठन के सँवर के में कौन सा अलंकार है
‘कालिंदी कूल कदंब की डारिन’ में कौन सा अलंकार है
हमारे हरि हारिल की लकरी’ में कौन सा अलंकार है
नाक का मोती अधर की कांति से में कौन सा अलंकार है