इसमें यमक अलंकार है.
तारे आसमान के हैं आये मेहमान बनि में कौन सा अलंकार है
चरर मरर खुल गए अरर रवस्फुटों से, में कौन-सा अलंकार है
‘राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा का पाला था।’ में कौन सा अलंकार है
या अनुरागी चित्त की गति समझे नहिं कोय में कौन सा अलंकार है
दिवस का समय, मेघ आसमान से उतर रही है, वह संध्या सुंदरी सी, धीरे धीरे।’ में कौन सा अलंकार है
‘मुख बाल रवि सम लाल होकर ज्वाला – सा हुआ बोधित’ में कौन सा अलंकार है
एक सुंदर सीप का मुँह था खुला में कौन सा अलंकार है
सठ सुधरहिं सतसंगति पाईं में कौन सा अलंकार है
सो सुख सुजस सुलभ मोहि स्वामी में कौन सा अलंकार है
'सो सुख सुजस सुलभ मोहि स्वामी' में कौन-सा अलंकार है
हाय! फूल-सी कोमल बच्ची, हुई राख की ढेरी में कौन-सा अलंकार है
अमिय मूरिमय चूरन चारु समन सकल भव रुज परिवारु में कौन सा अलंकार है
मैया मैं तो चंद्र खिलौना लैहों में कौन सा अलंकार है
केकी रव की नुपुर ध्वनि सुन, जगती जगती की मूक प्यास।’ में कौन सा अलंकार है
अंबर के तारे मानो मोती अनगन है में कौन सा अलंकार है
कंकन किंकिनि नूपुर धुनि सुनि, कहत लखन सन राम हृदय गुनि,में कौन सा अलंकार है
खंड-खंड करताल बाजार ही विशुद्ध हवा।’ में कौन सा अलंकार है
‘कलियाँ दरवाज़े खोल खोल जब झुरमुट में मुस्काती हैं।’ में कौन सा अलंकार है
चरण धरत, चिंता करत, चितवत चारहुँ ओर में कौन सा अलंकार है
इस करुणा कलित हृदय में अब विकल रागिनी बजती में कौन सा अलंकार है
मैं बरजी कै बार तू, इतकत लेती करौंट। पंखुरी लगे गुलाब की, परि है गात खरौंट।’ में कौन सा अलंकार है
मेरे नगपति! मेरे विशाल! में कौन सा अलंकार है
‘प्रश्न चिन्हों में उठी हैं भाग्य-सागर की हिलोंरे।’ में कौन सा अलंकार है
ऊँचे घोर मन्दर के अंदर रह न बारी, ऊँचे बोर मन्दर के अन्दर रहती है में कौन सा अलंकार है
दान-परसु बुधि-शक्ति प्रचंडा , बर-बिज्ञान कठिन कोदण्डा।’ में कौन सा अलंकार है
देखि सुदामा की दीन दशा करुना करिके करुना निधि रोए।’ में कौन सा अलंकार है
यह देखिये , अरविन्द – शिशु वृन्द कैसे सो रहे।’ में कौन सा अलंकार है
बहुरि बदन-बिधु अंचल ढाँकी।’ में कौन सा अलंकार है।
रघुपति राघव राजा राम में कौन सा अलंकार है
चंचला स्नान कर आए में कौन सा अलंकार है
‘फूल हँसे कलियाँ मुसकाई।’ में कौन सा अलंकार है
सिंधु सा विस्तृत और अथाह एक निर्वासित का उत्साह’ में कौन सा अलंकार है
वन शारदी चंद्रिका चादर ओढ़े में कौन सा अलंकार है
हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग में कौन सा अलंकार है
लोने-लोने वे घने चने क्या बने-बने इठलाते हैं, हौले-हौले होली गा-गा धुंघरू पर ताल बजाते हैं।’ में कौन सा अलंकार है
सारंग ले सारंग चली कर सारंग की ओट , सारंग झीनो देखकर सारंग कर गई चोट,में कौन सा अलंकार है
खुले कोरे पृष्ठ जैसा वही उज्ज्वल, वही पावन रूप में कौन-सा अलंकार है
"तरनि तनूजा तट तमाल तरुवर बहु छाए" में कौन सा अलंकार की उत्पत्ति होती है
किसी सोच में हो विभोर साँसें कुछ ठंडी खिंची। फिर झट गुलकर दिया दिया को दोनों आँखें मिंची।’ में कौन सा अलंकार है
तोपर वारौं उर बसी, सुन राधिके सुजान, तू मोहन के उर बसी ह्वे उरबसी सामान. इसमें कौन सा अलंकार है
निपट निरंकुस निठुर निसंकू में कौन सा अलंकार है
मेघ आये बड़े बन-ठन के संवर के।’ में कौन सा अलंकार है
तारावलि-सी मृदु मुसकान में कौन-सा अलंकार है
‘धीरे-धीरे उतर क्षितिज से आ बसंत-रजनी।’ में कौन सा अलंकार है
लो हरित धरा से झांक रही, नीलम की कली, तीसी नीली।’ में कौन सा अलंकार है
‘प्रतिभट कटक कटीले केते काटि काटि’ में कौन सा अलंकार है
लसत सूर सायक-धनु-धारी में कौन सा अलंकार है
मुख मयंक सम मंजु मनोहर,में कौन सा अलंकार है
कढ़त साथ ही म्यान तें, असि रिपु तन ते प्रान ।’ में कौन सा अलंकार है
‘इस सोते संसार बीच, जगकर सजकर रजनीबाले।’ में कौन सा अलंकार है
कूकै लगी कोयल कदंबन पर बैठी फेरि।’ में कौन सा अलंकार है
‘जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं।’ में कौन सा अलंकार है
लट लटकनि मनु मत्त मधुप गन मादक मधुहिं पिए में कौन सा अलंकार है
जानति सौति अनीति है में कौन सा अलंकार है
ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहन वारी। ऊँचे घोर मन्दर के अन्दर रहती है में कौन सा अलंकार है
जेते तुम तारे तेते नभ में न तारे हैं, इसमें कौन सा अलंकार है
नारी, नारी, नारी; इसकी छवि है सबसे प्यारी में कौन सा अलंकार है
‘सपना-सपना समझ कर भूल न जाना’ में कौन सा अलंकार है
लो यह लतिका भी भर लाई, मधु मुकुल नवल रस गागरी में कौन सा अलंकार है
अति मलिन वृषभानुकुमारी, अधोमुख रहति, उरध नहीं चितवत, ज्यों गथ हारे थकित जुआरी, छूटे चिहुर बदन कुम्हिलानो, ज्यों नलिनी हिमकर की मारी’ में कौन सा अलंकार है
ध्वनि मयी कर के गिरि-कंदरा, कलित-कानन-केलि-निकुंज को,में कौन सा अलंकार है
कहती हुई यों उत्तरा के नेत्र जल से भर गए में कौन सा अलंकार है
जरा से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो में कौन सा अलंकार है
‘दादुर धुनि चहुँ दिशा सुहाई। बेद पढ़हिं जनु बटु समुदाई ।’ में कौन सा अलंकार है
रती-रती सोभा सब रति के शरीर की,मैं कौन सा अलंकार है
अरहर सनई की सोने की, कंकरिया है शोभाशाली।’ में कौन सा अलंकार है
रावण सिर-सरोज-वनचारी में कौन सा अलंकार है
नभ पर चमचम चपला चमकी में कौन सा अलंकार है
दीपक-सा जलना होगा में कौन-सा अलंकार है
बिनु पग चले सुने बिनु काना में कौन सा अलंकार है
‘आवत जात कुंज की गलियन रूप सुधा नित पीजै। गोपी पद-पंकज पावन की रज जामे भीजै।’ में कौन सा अलंकार है
सोहत ओढ़े पीत पट स्याम सलोने गात में कौन सा अलंकार है
लहरें व्योम चूमती उठतीं में कौन सा अलंकार है
सागर के उर पर नाच-नाच करती हैं लहरें मधुर गान।’ में कौन सा अलंकार है
‘कहती हुई यूँ उत्तरा के नेत्र जल से भर गए। हिम कणों से पूर्ण मानों हो गए पंकज नए।’ में कौन सा अलंकार है।
शोभा-सिंधु ना अंत रही है।’ में कौन सा अलंकार है
नभ मंडल छाया मरुस्थल सा दल बाँध के अंधड़ आवे चला में कौन-सा अलंकार है
या मुरली मुरलीधर की, अधरान धरी अधरा न धरौंगी में कौन सा अलंकार है
माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर, कर का मनका डारि दै, मन का मनका फेर में कौन सा अलंकार है