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हालात की मजबूरी थी और यह महसूस किया गया कि जिस रास्‍ते पर हम चल रहे हैं उसके द्वारा गतिरोध को दूर नहीं किया जा सकता, अत: हमको देश का विभाजन स्‍वीकार करना पड़ा” यह कथन किसका है

हालात की मजबूरी थी और यह महसूस किया गया कि जिस रास्‍ते पर हम चल रहे हैं उसके द्वारा गतिरोध को दूर नहीं किया जा सकता, अत: हमको देश का विभाजन स्‍वीकार करना पड़ा” यह कथन पंडित जवाहरलाल नेहरू का है।