रुचि तथा ध्यान एक ऐसे सिक्के के दो पहलू हैं। एक के अभाव में दूसरा नहीं हो सकता है। क्योंकि किसी कार्य को हम ध्यान पूर्वक तभी कर सकते हैं जब उस कार्य में हमारी रुचि होगी।
पानी से भरे एक बर्तन में बर्फ का एक टुकड़ा तैर रहा हैं, पूरी बर्फ को पिघलने पर बर्तन का जलस्तर होगा