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पंकज तो पंकज, मृगांक भी है मृगांक री प्यारी​। ​मिली न तेरे मुख की उपमा, देखी वसुधा सारी में कौन सा अलंकार है

पंकज तो पंकज, मृगांक भी है मृगांक री प्यारी​। ​मिली न तेरे मुख की उपमा, देखी वसुधा सारी में अनुप्रास अलंकार है.